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चांद पर ठिकाना होगा

पंचदेव

चांद पर ठिकाना होगा






अब चांद पर भी शायद अपना आशियाना होगा 

ये सपने भी साकार होंगे, जब अभियान पूरा होगा

वहां जानेवाले लोग बड़े ही खुशनसीब होंगे

पर अपना तो यहीं खाना-पीना, रहना होगा.

चांद पर भी वैज्ञानिकों का ठिकाना होगा 

सूरज निकेलगा और मौसम भी सुहाना होगा.

टूट जाएंगे सदियों से बने भरम सबों के

मस्ती, उल्लास व खुशियों का जमाना होगा.

चांद पर लिखी सब कविताएं वहां पुरानी होगी 

फिर वहाँ पर भी पृथ्वी की कथा-कहानी  होगी 

तब चांद में प्रेयसी को देखना सब भूल  जाएंगे

जब चांद पर हमारी दूसरी दुनिया की बारी होगी. 

वहां की सभ्यता और संस्कृति वैज्ञानिक होगी

मानव जीवन सीधा-सादा और प्रायोगिक होगी

कुछ मिलेंगे तो कुछ खो देंगे विरासत यहां की 

चांद से देखेंगे पृथ्वी को तब याद ताजी होगी. 

मंदिर-मस्जिद से अधिक प्रयोगशालाएं होगी 

जाति भेद को छोड़ प्रेम में डूबी बालाएं होंगी 

इंसानियत की डोर से बंधे होंगे वहां के लोग 

टूट जाएंगे सभी भरम और लीलाएं होगी. 

फल-फूल भी उगेंगे और नदियां भी होंगी 

उसमें जहाज और मछलियां भी होंगी 

बारिश होगी तो अद्भुत होगी अनुभूति 

झूमती फसलें और मोरों की टोलियां भी होगी.





                                            

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